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डिप्टी सीएम का शर्मसार करने देने वाला बयान -ऐसा करो,पत्रकारिता छोड़कर नेतागीरी करो’,

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पत्रकारों के लिए यूपी नहीं रहा सुरक्षित

शनिवार को उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने प्रेस कांफ्रेंस की | कांफ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने डिप्टी सीएम से पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर सवाल किया- सरायइनाइत के पीड़ित पत्रकार जो पिटे हैं उनके साथ कैसे न्याय होगा सर| इसके जवाब में डिप्टी सीएम बोले – ऐसा करो,पत्रकारिता छोड़कर नेतागीरी करो’ एक बार बताए कि हम अप्लिकेशन ले चुके हैं, तो तुम बार-बार वही नेतागीरी कर रहे हो।”

https://youtu.be/xNfbZoUjK30

केशव प्रसाद मौर्य का यह बयान हम सभी पत्रकारों के पत्रकारिता पर एक धब्बा है| उनकी इस अभद्र टिप्पणी ने सभी को शर्म सार कर दिया है| इसके बाद से यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है|

अंग्रेजी में कहावत है – पेन इज माइटियर देन स्वॉर्ड (the pen is mightier than sword) हिंदी में कहे तो, कलम तलवार से अधिक शक्तिशाली है |लेकिन यूपी सरकार ने इस कहावत को गलत ठहरा दिया, यहां अक्सर पेन की निंब तोड़ दी जाती है | यूपी में कलम से ज्यादा ताकतवर हैं प्रशासन, पुलिस और अपराधी |

उत्तर प्रदेश में कोई सी भी सरकार रही हो, लेकिन पत्रकारों को धमकाने, पीटने और हत्या के मामलों में कोई कमी नहीं आई | पत्रकारों के लिए अब यूपी सुरक्षित नहीं रहा|

एक मामला है यूपी के शामली का, जहां रेलवे पुलिस ने मालगाड़ी के डिब्बों के पटरी से उतरने की खबर कवर कर रहे पत्रकार अमित शर्मा को बेरहमी से पीटा  

पांच सालों से हो रहे है पत्रकारों पर हमले

देश में बीते पांच सालों से पत्रकारों पर हमले के 198 गंभीर मामले सामने आए और इसी बीच 40 पत्रकारों की मौत भी हो गई |

हाल के दिनों मे भी पत्रकारों को रिपोटिंग के दौरान पुलिस की कारवाई झेलनी पड़ी|

साल 2014 से 2019 के बीच पत्रकारों पर हुए हमलों के 198 गंभीर मामले सामने आए, इनमें 36 मामले तो सिर्फ 2019 में ही दर्ज किए गए हैं | छह मामले तो हाल ही में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन में सामने आए|
साल 2020 में पत्रकारों पर हमले और बढ़ गए हैं। पीलीभीत, बलिया और गाजियाबाद की घटना इसका उदाहरण है|

द हिंदू’ के पत्रकार उमर राशिद को पुलिस ने दो घंटे थाने में रखा

पिछले दिनों लखनऊ में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ के पत्रकार उमर राशिद को दो घंटे के लिए थाने में बिठा लिया था| उमर पुलिस को शुरुआत में हीक्षअपना परिचय दे चुके थे, लेकिन पुलिस ने अपनी दादागिरी के आगे एक न सुनी |

बता दे, उमर अपने दोस्तों के साथ एक ढाबे में बैठे हुए थे, तभी पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए थाने ले गई. हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें यह कहकर छोड़ दिया कि गलतफहमी की वजह से उन्हें थाने ले जाया गया| ये तो बस एक उदाहरण है, ऐसे न जानें कितने मामले है
मेरा आप सब से एक सवाल, जब उत्तर प्रदेश में पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम जनता कैसे सुरक्षित होगी? जहां रात में छोडिये दिन में किसी के साथ कोई घटना हो जाए, तो उसकी आवाज दबा दी जाती है…

Article by – Rashi bansal

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